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AePS ऑपरेटर KYC नया नियम 2026: RBI का निर्देश, 3 महीने निष्क्रिय पर दोबारा KYC

RBI ने 27 जून 2025 के निर्देश में कहा है कि 1 जनवरी 2026 से बैंक हर AePS टचपॉइंट ऑपरेटर की पूरी KYC जाँच करेंगे। इस पोस्ट में AePS ऑपरेटर KYC के नए नियम की पूरी जानकारी है: कौन-सी जाँच होगी, लगातार 3 महीने लेन-देन न करने पर दोबारा KYC क्यों ज़रूरी है, बैंक किन बातों पर निगरानी रखेंगे, और AePS रिटेलर को क्या ध्यान रखना चाहिए। RBI वाली हर बात उसके मूल निर्देश से मिलाई गई है।

इस लेख में छिपाएँ

AePS ऑपरेटर KYC नया नियम: एक नज़र में

जानकारीविवरण
जारी करने वाली संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
निर्देश का नामAadhaar Enabled Payment System – Due Diligence of AePS Touchpoint Operators
तारीख27 जून 2025
संदर्भ संख्याRBI/2025-26/63, CO.DPSS.POLC.No.S339/02-01-001/2025-2026
लागू होने की तारीख1 जनवरी 2026
किसे निर्देश दिया गयाअनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (RRB सहित), शहरी सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक, ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक और NPCI
मुख्य बातऑपरेटर की KYC, 3 महीने निष्क्रिय रहने पर दोबारा KYC, लगातार निगरानी
आधिकारिक स्रोतRBI की अधिसूचना

AePS टचपॉइंट ऑपरेटर (ATO) कौन होता है?

RBI के निर्देश में कुछ शब्द तय किए गए हैं:

  • AePS टचपॉइंट: बैंक द्वारा लगाया गया वह टर्मिनल जिससे AePS लेन-देन होता है। यह मोबाइल भी हो सकता है और एक जगह लगा हुआ भी।
  • AePS टचपॉइंट ऑपरेटर (ATO): वह व्यक्ति जिसे बैंक इस टचपॉइंट को चलाने के लिए जोड़ता है। आम तौर पर AePS से नकद निकासी कराने वाले रिटेलर और CSP पॉइंट चलाने वाले लोग इसी दायरे में माने जाते हैं।
  • अधिग्रहण बैंक (Acquiring Bank): वह बैंक जो ऑपरेटर को AePS के लिए जोड़ता है।

AePS की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी AEPS Full Form, फ़ायदे और ट्रांज़ैक्शन लिमिट वाली पोस्ट पढ़ें।

नए नियम में क्या-क्या तय किया गया है?

  • जोड़ने से पहले पूरी जाँच: बैंक को ऑपरेटर को जोड़ने से पहले उसकी due diligence करनी होगी। इसके लिए KYC Master Direction, 2016 की व्यक्तिगत ग्राहक वाली प्रक्रिया अपनानी होगी।
  • पहले से जाँचे गए ऑपरेटर: अगर ऑपरेटर की due diligence पहले ही BC या सब-एजेंट के रूप में हो चुकी है, तो बैंक उसी पर भरोसा कर सकता है।
  • समय-समय पर KYC अपडेट: बैंक को ऑपरेटरों की KYC नियमित रूप से अपडेट करनी होगी।
  • 3 महीने निष्क्रिय तो दोबारा KYC: लगातार तीन महीने कोई लेन-देन न होने पर आगे लेन-देन से पहले KYC दोबारा करनी होगी।
  • लगातार निगरानी: बैंक को ऑपरेटर की गतिविधि पर transaction monitoring सिस्टम से नज़र रखनी होगी।
  • टेक्नोलॉजी पर रोक: API जैसी तकनीकी व्यवस्था सिर्फ़ AePS लेन-देन के लिए इस्तेमाल हो, इसके लिए बैंक को सिस्टम-स्तर के नियंत्रण रखने होंगे।

लगातार 3 महीने लेन-देन न करने पर क्या होगा?

RBI के निर्देश के अनुसार अगर किसी ऑपरेटर ने लगातार तीन महीने तक ग्राहक के लिए कोई वित्तीय या ग़ैर-वित्तीय लेन-देन नहीं किया, तो बैंक को उसकी KYC दोबारा पूरी करनी होगी। इसके बाद ही उसे आगे लेन-देन की अनुमति मिलेगी।

AePS में वित्तीय सेवाएँ नकद निकासी, नकद जमा और फंड ट्रांसफर हैं, और ग़ैर-वित्तीय सेवाएँ बैलेंस इंक्वायरी और मिनी स्टेटमेंट हैं। इसलिए जो आईडी लंबे समय तक इस्तेमाल में नहीं रहती, उसे दोबारा चालू कराने के लिए KYC की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ सकता है। आईडी को बिना काम के बहुत दिन खाली न छोड़ना ही समझदारी है।

बैंक किन बातों के आधार पर निगरानी करेंगे?

निर्देश के अनुसार बैंक हर ऑपरेटर के लिए उसके कारोबारी जोखिम के हिसाब से संचालन के मानक (operational parameters) तय करेंगे। ये मानक तय करते समय इन बातों को ध्यान में रखा जाएगा:

  • ऑपरेटर की जगह (location) और उसका प्रकार
  • लेन-देन की संख्या (volume)
  • लेन-देन की गति (velocity), यानी कितने कम समय में कितने लेन-देन

ये मानक बैंक की fraud risk management व्यवस्था का हिस्सा होंगे और नए फ्रॉड ट्रेंड के हिसाब से समय-समय पर बदले जाएँगे। व्यवहार में इसका मतलब यह हो सकता है कि किसी ऑपरेटर के लेन-देन की संख्या या रफ़्तार अचानक बहुत बदलने पर बैंक उसे जाँच के दायरे में ले सकता है। यह हमारी समझ है, निर्देश में ऐसा सीधे नहीं लिखा है।

निर्देश में क्या तय नहीं किया गया है?

RBI के निर्देश के पाठ में ये बातें नहीं हैं, इसलिए इनके बारे में कोई भी तारीख या संख्या पक्की मानकर न चलें:

  • KYC दोबारा कितने साल या महीने बाद अपडेट होगी, इसका तय अंतराल।
  • ऑपरेटर के लिए लेन-देन की कोई तय रकम की सीमा।
  • पुराने ऑपरेटरों के लिए अलग से कोई बदलाव-अवधि (transition period)।

इनकी जानकारी के लिए अपने बैंक या जिस प्लेटफ़ॉर्म से आपकी AePS आईडी चलती है, उससे पूछें।

इसी से जुड़ा NPCI का नया नियम: ₹5,000 से ऊपर OTP

ऑपरेटर की KYC वाला नियम RBI का है, जबकि ग्राहक के लेन-देन की सुरक्षा के लिए NPCI ने अलग नियम निकाला है। NPCI के सर्कुलर (NPCI/2026-27/AePS/001/096, 12 जून 2026) के अनुसार AePS की नकद निकासी और BHIM Aadhaar Pay लेन-देन में ₹5,000 से ऊपर की राशि पर फिंगरप्रिंट के साथ आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाला OTP भी ज़रूरी है। बैंकों और एग्रीगेटरों को यह बदलाव 30 जून 2026 तक अपने सिस्टम में करना था, और NPCI इस सीमा को आगे बदल सकता है। पूरा ब्योरा हमारी NPCI के AEPS नए नियम वाली पोस्ट में है।

AePS रिटेलर के लिए चेकलिस्ट

नीचे के सुझाव हमारे हैं, RBI के निर्देश का हिस्सा नहीं:

  • अपने बैंक या प्लेटफ़ॉर्म से पूछ लें कि आपकी KYC पूरी है या अपडेट की ज़रूरत है।
  • आईडी को लंबे समय तक बिना लेन-देन के न छोड़ें, ताकि दोबारा KYC की नौबत न आए।
  • आम तौर पर KYC में आधार, पैन, पता और बैंक खाते की जानकारी माँगी जाती है। इन्हें और अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें। सही सूची अपने बैंक या प्लेटफ़ॉर्म से लें।
  • ग्राहक जितनी राशि माँगे उतनी ही निकालें, और ₹5,000 से ऊपर की निकासी से पहले ग्राहक को बता दें कि OTP आएगा।
  • अपनी RD Service और डिवाइस अपडेट रखें। लेन-देन में एरर आए तो AEPS Error Codes की लिस्ट देखें।
  • KYC के नाम पर किसी को OTP, पिन या पासवर्ड न बताएँ। KYC सिर्फ़ अपने बैंक या प्लेटफ़ॉर्म के आधिकारिक ऐप या पोर्टल पर ही करें।
  • अपने इलाके में AePS पर रोक तो नहीं है, यह AEPS Blocked Pin Code List में देख लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

AePS ऑपरेटर KYC का नया नियम क्या है?

RBI ने 27 जून 2025 के निर्देश में कहा है कि बैंक हर AePS टचपॉइंट ऑपरेटर को जोड़ने से पहले उसकी पूरी KYC और due diligence करेंगे, समय-समय पर KYC अपडेट करेंगे, उसकी गतिविधि पर लगातार नज़र रखेंगे, और लगातार 3 महीने कोई लेन-देन न होने पर आगे लेन-देन की अनुमति से पहले दोबारा KYC कराएँगे।

AePS ऑपरेटर KYC का नियम कब से लागू है?

RBI के निर्देश के अनुसार यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू है।

AePS में 3 महीने तक लेन-देन न करने पर क्या होगा?

अगर ऑपरेटर ने लगातार तीन महीने तक ग्राहक के लिए कोई वित्तीय या ग़ैर-वित्तीय लेन-देन नहीं किया, तो बैंक को आगे लेन-देन की अनुमति देने से पहले उसकी KYC दोबारा करनी होगी।

क्या पहले से BC या सब-एजेंट के रूप में जाँचे गए रिटेलर की KYC दोबारा होगी?

RBI के निर्देश में कहा गया है कि अगर ऑपरेटर की due diligence पहले BC या सब-एजेंट के रूप में हो चुकी है, तो बैंक उस पर भरोसा कर सकता है। समय-समय पर KYC अपडेट फिर भी करना होता है।

AePS ऑपरेटर की KYC कितने समय बाद अपडेट करानी होगी?

RBI के निर्देश में बस इतना कहा गया है कि बैंक समय-समय पर KYC अपडेट करेंगे। इसका कोई तय अंतराल उसमें नहीं लिखा है। यह जानकारी अपने बैंक या प्लेटफ़ॉर्म से ही पूछें।

क्या AePS में ₹5,000 से ज़्यादा निकालने पर OTP ज़रूरी है?

NPCI के 12 जून 2026 के सर्कुलर के अनुसार ₹5,000 से ज़्यादा की AePS नकद निकासी और BHIM Aadhaar Pay लेन-देन में बायोमेट्रिक के साथ आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाला OTP भी ज़रूरी है। NPCI इस सीमा को आगे बदल भी सकता है।

क्या यह नियम सीधे रिटेलर पर लागू होता है?

RBI का निर्देश बैंकों को दिया गया है, यानी KYC और निगरानी की ज़िम्मेदारी बैंक की है। रिटेलर पर इसका असर बैंक या आपके प्लेटफ़ॉर्म की KYC प्रक्रिया के रूप में दिखता है।


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निष्कर्ष

AePS ऑपरेटर KYC का नया नियम 1 जनवरी 2026 से लागू है। इसके तहत बैंक ऑपरेटर को जोड़ने से पहले पूरी KYC करेंगे, समय-समय पर उसे अपडेट करेंगे, और लगातार 3 महीने लेन-देन न होने पर दोबारा KYC कराएँगे। रिटेलर के लिए सबसे काम की बातें हैं: अपनी KYC अपडेट रखना, आईडी को लंबे समय तक खाली न छोड़ना और ₹5,000 से ऊपर की निकासी पर OTP के बारे में ग्राहक को बताना। नियम का पूरा पाठ RBI की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। यह पोस्ट 18 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी पर आधारित है, कोई बदलाव आने पर हम इसे अपडेट करेंगे।

Hindi Advice

लेखक: अभिषेक चौरसिया

Hindi Advice के संस्थापक। Aadhaar, CSC, AEPS, Fino Payment Bank और Banking से जुड़ी जानकारी आसान हिंदी में लिखते हैं। जानकारी आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है और समय-समय पर अपडेट की जाती है।

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